Reva: India’s First Electric Car That Everyone Forgot-Part 2: The Fall

2010 में इंडिया की सबसे बड़ी औटोमोटिव कंपनी की नजर उस छोटी सी बैंगलोर की कंपनी पे पड़ी-जिस कंपनी को मीडिया ने इग्नोर किया था, गवर्नमेंट ने भुला दिया था, और पब्लिक ने कभी सीरियसली नहीं लिया था।
महिंद्रा एण्ड महिंद्रा ने Reva electric Car कंपनी में 55.2% कन्ट्रोलिंग स्टेक खरीदा। डील की इग्ज़ैक्ट रकम कभी पब्लिकली अनाउन्स नहीं की गई। लेकिन एक बात साफ थी की Reva अब एक इंडिपेंडेंट ड्रीम नहीं था। वो अब एक कॉर्पोरेट मशीन का हिस्सा था।
बहुर से लोग सोचते है की Reva के लिए ये एक बड़ी जीत थी। इंडिया की लार्जेस्टऔटोमोटिव कॉर्पोरेशन का साथ मिल गया। रिसोर्सेस मिल गए- मैन्यफैक्चरिंग स्केल, चार्जिंग इन्फ्रस्ट्रक्चर। अब Reva की स्टोरी बदलेगी।

चेतन मैनी- फाउन्डर का नया रोल

जब कोई अपनी कंपनी किसी बड़ी कंपनी को बेचता है, तो एक अजीब चीज होती है। टेक्निकली आप वहां होते है, आपका नाम होता है, आपकी डेज़िग्नैशन होती है, लेकिन डिसिजन्स अब आपके नहीं होते।
चैतन मैनी महिंद्रा रेवा में चीफ़ ऑफ टेक्नॉलजी एण्ड स्ट्रेटेजी बने। उन्होंने 3 साल वहां नए पेटेंट्स फाइल किए-एनर्जी मैनेजमें, रीमोट डायग्नोस्टिक्स, फास्ट चार्जिंग पे 30 से ज्यादा पेटेंट्स फाइल किए, इन्होंने e2o डेवलप किया। बैंगलोर में एक वर्ल्ड-क्लास मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी बनाई जो 30,000 कार्स पर इयर प्रोड्यूस कर सकती थी। 2013 में वो सीईओ बने। और 2015 में उन्होंने एग्जिट किया। साथ ही उन्होंने अफिशल स्टेटमेंट दिया-“द बिजनेस हैज़ रीच्ड अ लेवल व्हेयर इट कैन मूव ऑन इट्स ओन टू अ हायर लेवल. आई हैव बीन एसोसिएटेड विद द कंपनी फॉर 20 लॉन्ग इयर्स.

mahindra e2o
image source: https://commons.wikimedia.org/

e2o- नया नाम

मार्च 2013 मे महिंद्रा रेवा ने e2o लॉन्च की। यह टेक्निकली रेवा का सक्सेसर थी। बेटर डिजाइन, लिथियम-आयन बैटरी, इम्प्रूव्ड रंज और कनेक्टेड कार फीचर्स। तब इस कार की प्राइस 5,96,000 तय की गई थी। महिंद्रा का टार्गेट था 500 यूनिट्स पर मन्थ। ये रीअलिस्टिक था क्यूंकी कंपनी बहुत बड़ी थी, कंपनी के पास रिसोर्सेस थे, ब्रांड था और इंडिया में EV अवेर्नेस भी थोड़ी बढ रही थी।
लेकिन पूरे 15 महीने मे 1,000 यूनिट सेल्स और यह भी 4 सिटीज में अवैलबल थी- दिल्ली, मुंबई, बैंगलोर और पुणे। बाकी इंडिया के लिए e2o इग्ज़िस्ट ही नहीं करती थी प्रॅक्टिकली।

वो जिसे किसीने नहीं समझा

एक इंटरेस्टिंग फैक्ट है जिसे बहुत कम लोग जानते है, जब महिंद्रा ने रेवा अक्वायर की, तो GM इंडिया ने भी रेवा के साथ एक पार्ट्नर्शिप अनाउन्स की थी। प्लान था की रेवा की बैटरी टेक्नॉलजी यूज करके GM इंडिया अपनी हैच्बैक का इलेक्ट्रिक वर्ज़न बनाएगी- जिसका नाम होगा e-स्पार्क। यह 2010 के दिल्ली ऑटो एक्सपो में अनाउन्स हुआ था। लेकिन जैसे ही महिंद्रा ने रेवा का कंट्रोल लिया तो GM ने पार्ट्नर्शिप से हाथ खीच लिया। एक ऐसी कोलाबोरेशन जो इंडिया के EV फ्यूचर को पूरी तरह से बदल सकती थी वो शुरू होने से पहले ही खतम हो गई।
मानो यह एक पैटर्न बन चुका था रेवा के साथ। महिंद्रा ने e2o के साथ एक और इंटरेस्टिंग किया था- “एनर्जी मोडेल”। इसका मतलब था की आप कार खरीदो, बैटरी रेंट पे लो, और सिर्फ जितनी एनर्जी यूज करो उतना pay करो। पे-ऐज़-यू-गो मोडेल। आज यह कान्सेप्ट बैटरी स्वैपिंग के नाम से ग्लोबल EV इंडस्ट्री में मेनस्ट्रीम है। 2013 में रेवा ने ये ट्राइ किया था। लेकिन इंडिया उस वक्त इस कन्सेप्ट के लिए पूरी तरह से तैयार नहीं था। साइकोलॉजिकली यह अनफ़िट था इंडियन बायर के लिए जिसके लिए ओनरशिप का मतलब है- चीज अपनी होनी चाहिए।
चेतन मैनी ने अपनी लाइफ के 20 साल इस कंपनी को दिए। जब वो जा रहे थे, उन्होंने कहा – “The business has reached a level where it can move on its own. लेकिन उन वर्ड्स के पीछे क्या था- वो सिर्फ वो ही जानते हैं।

screenshot 2026 06 19 151239 (1)
image source: https://commons.wikimedia.org/

सवाल जिन्हे कोई पूछ नहीं रहा था

e2o फ़ेल क्यूँ हुई? बहुत से लोग बैटरी, रेंज या प्राइस को ब्लेम करते है। लेकिन असली जवाब थोड़ा और कॉम्प्लिकेटेड था। 2013 में इंडिया में EV चार्जिंग इन्फ्रस्ट्रक्चर प्रॅक्टिकली ना के बराबर था। अगर आप मुंबई में रहते थे और घर में चार्जर था, तो e2o काम करती। लेकिन अगर आप को हाइवै पे जाना है? अगर आप किसी ऐसी सोसाइटी में रहते है जहा पार्किंग में चार्जिंग पॉइंट नहीं है? अगर आपके ऑफिस में चार्जिंग फसिलिटी नहीं है?
तब एक बहुत महंगी इन्कन्वीन्यन्स बन जाती थी। इसके अलवा एक और चीज थी जो डाटा में नहीं आती-साइकोलॉजि इंडिया के मिडल क्लास बायर के लिए कार सिर्फ ट्रांसपोर्टेशन नहीं होती। बल्कि एक स्टेटस सिम्बल होता है। एक आचीवमेंट होती है। और उस वक्त इलेक्ट्रिक कार का मतलब था- कॉम्प्रोमाइज। छोटी रेंज, स्लो चार्जिंग, डर की कही रोड पर बंद पड जाए तो?

इतिहास खुद को दोहरा रहा था

एक चीज जो पार्ट 1 में भी थी- वो पार्ट 2 में भी रीपीट हुई। गवर्नमेंट ने सब्सिडी देने का वादा किया। लॉन्च डिले हुआ वादे का इंतज़ार करते करते। जब लॉन्च हुआ तब भी पॉलिसी क्लियर नहीं थी। चेतन मैनी ने पब्लिक्ली कहा की नॉर्वे में 2013 में 20% कार्स इलेक्ट्रिक थी क्यूंकी गवर्नमेंट ने सपोर्ट किया। इंडिया में वही साल EV इंडस्ट्री सब्सिडी की राह देख रही थी। साल 2001 हो या 2013, यह निराशाजनक पैटर्न कभी नहीं बदला। हमारे पास एक प्रॉमिसिंग टेक्नोलॉजी थी, एक जुनूनी टीम थी, लेकिन सिस्टम का जवाब हमेशा एक ही था—”अभी नहीं, सही वक्त आने पर देखेंगे।”
वही दूसरी तरफ UK मे भी e2o स्ट्रगल कर रही थी। G-Wiz की सेल्स पहले से गिरनी शुरू हो गई थी जबसे दूसरी कंपनीज की सीरीअस इलेक्ट्रिक कार्स मार्केट में आ गई थी। 2013 में महिंद्रा ने ऑफिशियली UK मार्केट से विथ्ड्रॉ कर लिया। वो मार्केट जहां रेवा ने अपनी सबसे बड़ी सक्सेस देखी थी- वो भी बंद हो गया।

2023- दी फाइनल चैप्टर

1 अप्रैल 2023 को महिंद्रा इलेक्ट्रिक मोबिलिटी लिमिटेड ऑफिशियली महिंद्रा एण्ड महिंद्रा मर्ज हो गई। एक अलग एन्टिटी के तौर पे वो इग्ज़िस्ट करना बंद हो गई। रेवा इलेक्ट्रिक कार कंपनी जो 1994 में एक सपने के साथ शुरू हुई थी- 2023 में आधिकारिक तौर पर सिर्फ इतिहास के पन्नों में एक छोटी सी टिप्पणी बनकर सिमट गई। चेतन मैनी अब sun mobility नाम की एक नई कंपनी चला रहे है जो बैटरी स्वैपिंग टेक्नॉलजी पे काम करती है। वो आज भी EVs के फ्यूचर पे बिलीव करते है। लेकिन रेवा का नाम उनकी CV में एक ऐसा चैप्टर है- जिसे इंडिया ने कभी प्रोपर्ली रीड नहीं किया। लेकिन रेवा की कहानी यहां खतम नहीं होती – आज जो बड़ी बड़ी कंपनीज़ की EVs सड़कों पर दौड़ती है जो गवर्नमेंट FAME स्कीम लेकर आ गई है इन सब की नींव कहीं न कही उस छोटी सी बैंगलोर की कंपनी ने रखी थी।

Leave a Comment