Reva: India’s First Electric Car That Everyone Forgot- Part 1: The Dream

कुछ इन्वेंशन्स दुनिया में बहुत जल्दी आ जाते है। इसलिए नहीं की वो गलत थे-बल्कि इसलिए की दुनिया उनके लिए अभी तैयार नहीं थी।
Reva एक ऐसी ही इन्वेंशन थी-
2001 में, जब इंडियन रोड्स पर मारुति 800 और हीरो होंडा का राज था, बैंगलोर की एक छोटी सी कंपनी ने एक ऐसी कार लॉन्च की जो पेट्रोल से नहीं इलेक्ट्रिसिटी से चलती थी। न कोई नॉइज़, न कोई धुँवा बस एक सिम्पल चार्ज और कार रेडी। लेकिन तब किसी ने ज्यादा ध्यान नहीं दिया, फिर London ने इस कार को अपना लिया। यह वो कहानी है जिसे शायद ही आपने सुनी होगी।

चेतन मैनी और उनका सपना

चेतन मैनी एक अलग किस्म के इंजीनियर थे। उन्होंने University of Michigan से पढ़ाई की, सोलर-पॉवर्ड रेस कार्स पे काम किया और फिर इंडिया वापस आए एक क्लेयर मिशन लेकर। वो एक ऐसी इलेक्ट्रिक कार बनाना चाहते जो कॉमन इंडियन लोग अफोर्ड कर सकें और डेली लाइफ में यूज कर सकें।
1994 में उन्होंने बैंगलोर मे रेवा इलेक्ट्रिक कार कंपनी की नींव रखी। यह मैनी ग्रुप और एक अमेरिकन कंपनी अमेरिगोन इलेक्ट्रिक वीइकल टेक्नोलॉजीस का जॉइन्ट वेन्चर था। दोनों का एक ही गोल था: एक अफोर्डेबल, एको-फ़्रेंडली अर्बन कार बनाना जो इंडियन सिटीज की प्रॉब्लेम्स सॉल्व कर सके। idea सिम्पल था। एक्सक्यूट करने में पूरे सात साल लग गए।

reva electric car front view
सोर्स: wikimedia Commons
2001 में लॉन्च और पहला झटका

जून 2001 में जब रेवा फाइनली रोड्स पे आई, तो उसकी प्राइस थोड़ी कम होनी चाहिए थी। लेकिन शोरूम तक पहुंचते पहुंचते यह ₹2,00,000 से उपर चली गई। वजह? गवर्नमेंट ने लॉन्च से पहले ₹1,00,000 पर कार सब्सिडी देने का वादा किया था। वो वादा पूरा नहीं हुआ। उपर से कंपोनेंट्स पे इम्पोर्ट ड्यूटी 8 पर्सेन्ट से बढ कर 16 पर्सेन्ट हो गई थी। चेतन मैनी ने सात साल मेहनत करके कार बना दी थी। लेकिन गवर्नमेंट के सपोर्ट के बिना, मार्केट में उतार ना बहुत मुश्किल था।

कार कैसी थी

REVAi एक बहुत छोटी कार थी। सिर्फ 2.6 मिटर लंबी और थोड़ी सी चौड़ी, इसमे दो अडल्ट और दो छोटे बच्चे आराम से बैठ सकते थे।
कार के फ्रन्ट सीट्स के नीचे आठ लेड-एसिड बैटरीज़ थी जो मिलकर 48 volts प्रडूस करती थी। इस इलेक्ट्रिक कार की टॉप स्पीड 80 केएमपीएच और एक फूल चार्ज पे यह 80 किलोमिटर तक चल सकती थी। घर के नॉर्मल सॉकेट से चार्ज होने मे 6 से 8 घंटे लगते थे।
आज के EV स्टैंडर्ड्स से कम्पेर करें तो यह नंबर्स बहुत छोटे लगते है। लेकिन 2001 के कंटेक्स्ट में यह एक्चुअली एक सॉलिड अचीवमेंट था। रनिंग कॉस्ट सिर्फ 50 पैसे पर किलोमीटर थी, जो उस वक्त के पेट्रोल प्राइसेस के कम्पैरिसन में बहुत अट्रैक्टिव थी।

इंडिया ने इग्नोर किया, लंदन ने अडाप्ट किया

एक इलेक्ट्रिक कार? ऐसी कन्ट्री जहा लोड शेडिंग आम बात थी? चार्जिंग इन्फ्रस्ट्रक्चर का तो नाम भी नहीं था। लोग समझ नहीं पा रहे थे कि इस कार का क्या करें। सेल्स स्लो रही। पहले साल सिर्फ 250 कार्स बिकी पूरे इंडिया में।
लेकिन उसी वक्त UK में कुछ इन्ट्रेस्टिंग हो रहा था। 2004 में एक ब्रिटिश कंपनी GoinGreen ने रेवा इम्पोर्ट करनी शुरू की और उसे G-Wiz नाम दिया। लंदन ने अभी ट्रैफिक टैक्स शुरू किया था, जिसमे सिटी सेंटर में ड्राइव करने पे डेली फी लगती थी। इलेक्ट्रिक वीइकल को इस चार्ज से छूट थी।
यह G-Wiz के लिए परफेक्ट सिचूऐशन थी और लंदन के कम्यूटर्स के लिए यह फाइनांशीयली बहुत स्मार्ट चॉइस बन गई। पॉलिटिशियंस इस कार में ऑफिस जाने लगे, सेलेब्रिटीज इसके साथ स्पॉट होने लगी, यह एको-कान्शस लिविंग का एक सिम्बल बन गई।
वो कार जो इंडिया ने डेवलप की थी और फिर इग्नोर कर दी, वो 7,000 किलोमीटर दूर एक यूरोपियन सिटी में अपनी जगह बना रही थी।

reva electric image
सोर्स: wikimedia Commons
सैफ्टी

लेकिन G-Wiz की यह सक्सेस स्टोरी इतनी सिम्पल नहीं थी जितनी लगती है। यूरोप में G-Wiz को ऑफिशियली ‘कार’ की केटेगरी में नहीं रखा गया था, जिसका मतलब था की उसे स्टैन्डर्ड औटोमोटिव क्रैश टेस्ट्स पास नहीं करने थे। सैफ्टी एक्स्पर्ट्स और मीडिया ने यह नोटिस किया। पूछे जाने लगे की अगर कोई एक्सीडेंट हो तो इस कार में बैठने वाले लोग कितने सैफ है?
और फिर BBC के एक फेमस शो ने इस सवाल का जवाब, दुनिया के सामने रख दिया। जिस तरह से उन्होंने जवाब दिया, उसने G-Wiz और Reva दोनों को हमेशा के लिए एक अलग नजर से दिखवा दिया।

वापसी

BBC के उस शो का नाम था Top Gear। और जो उन्होंने किया वो सिर्फ एक रिव्यू नहीं था-वो एक पब्लिक एक्सक्यूशन थी। 2007 में Top Gear ने G-Wiz को ऑफिशियली “वर्स्ट कार ऑफ द यियर” डिक्लेर किया। जेम्स मे ने कैमरा के सामने कहा की यह ” सबसे स्टूपिड, यूजलेस और डैन्जरस कार” है जो उन्होंने कभी नहीं देखी। मिलियंस ऑफ वीवर्स ने यह देखा, हंसे शेयर किया और G-Wiz का इमेज हमेशा के लिए एक जोक बन गया।
लेकिन कंपनी ने इन क्रिटिसिज्म्स को सीरियसली लिया। 2008 में उन्होंने REVAi लॉन्च किया-एक कंप्लीटली अपडेटेड मोडेल, जिसमे Heavy-Duty Chassis, फ्रन्ट डिस्क ब्रेक्स और इम्पैक्ट-एब्जॉर्बिंग स्टीयरिंग था। और ये मोडेल फ्रन्टल क्रैश टेस्ट पास करता था। ARAI ने भी इसे सर्टिफाई कीया। उन्होंने गलती मानी, इम्प्रूव किया और वापिस आ गए लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
मीडिया का नेरटिव सेट हो चुका था। लोगों ने वो इक्स्प्लोशन याद रखा नया सेफर मोडेल नहीं। UK में सेल्स गिरने लगी, और इंडिया मे जो थोड़ी बहुत अवेर्नेस थी वो भी धीरे धीरे खतम होने लगी। एक कार जो अपनी गलतियों से सीख रही थी, उसे वो मौका नहीं मिल जो मिलन चाहिए था।

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